Day 95 | 5 Shlok Per Day | कर्म की परम्परा, मन का संयम और सर्वव्यापक परमात्मा



आज के 5 श्लोक बताते हैं कि मुमुक्षु भी कर्म करते थे, दिखावे वाला तप राजस है, संकल्प-त्याग के बिना योग नहीं बनता, भगवान अव्यक्त रूप से समस्त जगत में व्याप्त हैं, और चंचल मन को बार-बार आत्मा में लाना ही साधना है। 4.15, 6.26 और 9.4 मिलकर एक बहुत practical मार्ग देते हैं—कर्तव्य करो, मन संभालो, और परमात्मा की व्यापकता को याद रखो।

Description

Day 95 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: मुमुक्षुओं की कर्म-परम्परा (4.15), दम्भ और मान के लिये किया गया राजस तप (17.18), संकल्प-त्याग ही योग-सन्न्यास का आधार (6.2), अव्यक्तमूर्ति से जगत की व्यापकता (9.4), और चंचल मन को बार-बार आत्मा में लाने की साधना (6.26)। यह episode Jagat Ka Saar को discipline, depth और devotion के साथ जोड़ता है।

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