Day 97 | 5 Shlok Per Day | आशा-पाश, श्रद्धा और समत्व का मार्ग



आज के 5 श्लोक दिखाते हैं कि आशा और क्रोध की जंजीरें मनुष्य को अन्याय, संसार-भ्रमण और मोह में बाँधती हैं, जबकि श्रद्धा, भक्ति और समत्व मुक्ति की दिशा देते हैं। 16.12 में आशापाशशतों से बँधे मनुष्यों की प्रवृत्ति बताई गई है, और 9.3 श्रद्धा-रहित पुरुषों के मृत्युसंसार में लौटते रहने की बात कहता है।

Description

Day 97 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: सैकड़ों आशा-पाशों से बँधकर धन-संग्रह की दौड़ (16.12), श्रद्धा के अभाव में मुक्ति न पाना (9.3), संसार-वृक्ष की शाखाएँ और जड़ें (15.2), जो भक्त न हर्षित होता है न द्वेष करता है (12.17), और मन, वाणी, शरीर से किए गए कर्मों के पाँच कारण (18.15)। यह episode Jagat Ka Saar को desire, faith, detachment और karmic responsibility के साथ जोड़ता है।

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