Day 107 | 5 Shlok Per Day | पुनर्जन्म-मुक्ति, गुणातीत स्थिति और भक्त-प्रियता



आज के 5 श्लोक दिखाते हैं कि ब्रह्मलोक तक के सभी लोक लौटने वाले हैं, परन्तु भगवान को प्राप्त होने पर पुनर्जन्म नहीं होता। 8.16 और 4.9 मिलकर यह स्पष्ट करते हैं कि भगवान के दिव्य जन्म-कर्म को तत्त्वतः जानने वाला जन्म-मृत्यु के चक्र से छूटकर भगवान को ही प्राप्त होता है।

Description

Day 107 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: ब्रह्मलोक तक सभी लोकों की पुनरावृत्ति, पर भगवान को प्राप्त होने पर पुनर्जन्म से मुक्ति (8.16), दिव्य जन्म और कर्म को तत्त्वतः जानने वाला साधक (4.9), उदासीन साक्षी की तरह गुणों से न विचलने वाली स्थिति (14.23), हर्ष-अमर्ष-भय-उद्वेग से मुक्त भक्त की प्रियता (12.15), और युद्धभूमि में धनुष उठाता अर्जुन (1.2)। यह episode Jagat Ka Saar को liberation, steadiness, devotion और decisive action के साथ जोड़ता है।

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