Day 120 | 5 Shlok Per Day | अधियज्ञ-ज्ञान, व्यापक परमात्मा, और गुणों का बंधन



आज के 5 श्लोक भगवान को अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ सहित जानने, उनके व्यापक और सूक्ष्म स्वरूप को समझने, और सत्त्व-रज-तम के बंधन से जीव की स्थिति को देखने की शिक्षा देते हैं। 7.30 और 13.15 मिलकर यह बताते हैं कि जो युक्तचित्त है, वही अन्तकाल में भी भगवान को पहचान सकता है।

Description

Day 120 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ सहित भगवान का ज्ञान (7.30), चर-अचर सब भूतों में व्याप्त परमात्मा का सूक्ष्म स्वरूप (13.15), जैसे वायु आकाश में स्थित है वैसे ही सब भूतों का भगवान में स्थित होना (9.6), अविनाशी स्वरूप के दर्शन की अर्जुन की प्रार्थना (11.4), और सत्त्व-रज-तम गुणों द्वारा जीव का बंधन (14.5)। यह episode Jagat Ka Saar को all-pervading divinity, vision, surrender, and the pull of nature’s gunas के साथ जोड़ता है।

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