Day 124 | 5 Shlok Per Day | योगधारणा, कालज्ञान, धर्मानुकूल काम और परमपद


 

आज के 5 श्लोक अंतकाल की योगधारणा, भगवान के कालातीत ज्ञान, बल और काम की शुद्ध परिभाषा, दो मार्गों के ज्ञान से मोह-मुक्ति, और सतत कर्म करते हुए परमपद की प्राप्ति को जोड़ते हैं। 8.12 और 8.27 साधना की आंतरिक विधि बताते हैं, जबकि 7.11 और 18.56 भगवान की सर्वव्यापक कृपा और धर्मसम्मत ऊर्जा का मार्ग दिखाते हैं।

Description

Day 124 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: सब इन्द्रियों को रोककर मन को हृदय में स्थिर कर प्राण को मस्तक में स्थापित करने वाली योगधारणा (8.12), भूत, वर्तमान और भविष्य के सभी जीवों का ज्ञान रखने वाले भगवान को केवल भक्त ही जानता है (7.26), बलवानों का आसक्ति-रहित बल और धर्मानुकूल काम के रूप में भगवान की विभूति (7.11), दोनों मार्गों को तत्त्व से जानकर योगी का मोह से बच जाना और सर्वकाल योगयुक्त रहना (8.27), तथा सभी कर्म करते हुए भी भगवान की कृपा से शाश्वत अव्यय पद की प्राप्ति (18.56). यह episode Jagat Ka Saar को inner discipline, divine omniscience, and liberated action के साथ जोड़ता है.

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