Day 125 | 5 Shlok Per Day | युक्त जीवन, गुणों से परे दृष्टि, भक्तों की रमणीयता और श्रीहरि की महिमा



आज के 5 श्लोक भक्ति की महिमा, गुणों के उतार-चढ़ाव में समभाव, ज्ञान-ध्यान-त्याग की सीढ़ियाँ, भक्तों की परस्पर गीता-चर्चा, और संतुलित जीवन की योग-सिद्धि को साथ रखते हैं। 11.36 और 10.9 भगवान की स्तुति और भक्तों की inner joy दिखाते हैं, जबकि 12.12 और 6.17 साधक के लिए व्यावहारिक मार्ग बताते हैं।

Description

Day 125 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: भगवान के नाम-गुण-प्रभाव से जगत का हर्ष और राक्षसों का पलायन (11.36), सत्त्व-रज-तम के कार्यों से न द्वेष करना न आकांक्षा करना (14.22), अभ्यास से ज्ञान, ज्ञान से ध्यान, और ध्यान से कर्मफलत्याग की श्रेष्ठता (12.12), मच्चित्त भक्तों का परस्पर भगवान का कथन करते हुए निरन्तर संतोष और रमण (10.9), तथा युक्ताहार-विहार, युक्तचेष्टा और युक्तस्वप्नावबोध से दुःखहारी योग की सिद्धि (6.17)। यह episode Jagat Ka Saar को devotion, equanimity, wisdom, and balance के साथ जोड़ता है.

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