Day 126 | 5 Shlok Per Day | नरक-द्वार, अचल योगी, तामस भोजन और श्रीहरि का अद्भुत रूप


 आज के 5 श्लोक काम-क्रोध-लोभ से बचने, योगी के स्थिर चित्त, तामस भोजन की प्रकृति, अल्पबुद्धि के नाशवान फल, और श्रीहरि के अद्भुत रूप के स्मरण से होने वाले विस्मय को जोड़ते हैं। 16.21 और 6.19 साधक को भीतर की शुद्धि का मार्ग दिखाते हैं, जबकि 7.23 और 18.77 भक्ति की परिणति और भगवान के रूप की अपूर्वता को सामने रखते हैं।

Description

Day 126 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: काम, क्रोध और लोभ को नरक के तीन द्वार बताकर उनके त्याग की शिक्षा (16.21), वायुरहित स्थान के दीपक की तरह अचल योगी का जीते हुए चित्त का उदाहरण (6.19), अधपके, रसरहित, दुर्गन्धयुक्त और उच्छिष्ट भोजन की तामसिकता (17.10), देवताओं की उपासना से मिलने वाले नाशवान फल और भगवान के भक्तों की अंतिम प्राप्ति (7.23), तथा श्रीहरि के अत्यद्भुत रूप को बार-बार स्मरण करने पर होने वाला महान विस्मय और हर्ष (18.77)। यह episode Jagat Ka Saar को self-control, purity, devotion, and wonder के साथ जोड़ता है.

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