Day 134 | 5 Shlok Per Day | क्षेत्रज्ञ का बोध, यश-अपयश की चुनौती, योग का सुख और ज्ञान की दो निष्ठाएँ



आज के 5 श्लोक बताते हैं कि सब क्षेत्रों में क्षेत्रज्ञ को परमात्मा ही जानना चाहिए, अपकीर्ति माननीय पुरुष के लिए मृत्यु से भी भारी है, निरन्तर आत्मा को परमात्मा में लगाकर योगी अनन्त सुख का अनुभव करता है, परमात्मा ज्योतियों का भी ज्योति और सबके हृदय में स्थित हैं, और इस लोक में ज्ञानयोग तथा कर्मयोग—दोनों की अलग निष्ठाएँ हैं। 13.2 और 13.17 साधक को तत्त्व-बोध की गहराई देते हैं, जबकि 2.34 और 6.28 जीवन-सम्मान तथा परमसुख के व्यावहारिक पक्ष दिखाते हैं।

Description

Day 134 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: सब क्षेत्रों में क्षेत्रज्ञ को भी भगवान ही मानना (13.2), माननीय पुरुष के लिए अपकीर्ति का मरण से भी भारी होना (2.34), निरन्तर आत्म-समर्पण से पापरहित योगी का ब्रह्मसंस्पर्शजन्य अनन्त सुख अनुभव करना (6.28), परमात्मा का ज्योतियों का भी ज्योति, ज्ञानस्वरूप और सबके हृदय में स्थित होना (13.17), और इस लोक में ज्ञानयोगियों व कर्मयोगियों की दो निष्ठाओं का भगवान द्वारा कथन (3.3)। यह episode Jagat Ka Saar को self-knowledge, reputation, meditation, inner light, and the two paths of yoga के साथ जोड़ता है.

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