Day 138 | 5 Shlok Per Day | श्रद्धा, तामस तप, अवतार, कर्मयोग की निष्कलुषता



आज के 5 श्लोक श्रद्धा के साथ गीता-श्रवण का फल, तामस तप की परिभाषा, धर्म की ग्लानि पर भगवान के अवतरण, कर्मयोगी की निष्कलुषता, और क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ ज्ञान के शास्त्रीय आधार को सामने रखते हैं। 18.71 और 4.7 साधक को श्रद्धा और अवतार-तत्त्व का आश्वासन देते हैं, जबकि 17.19, 5.7 और 13.4 तप, कर्म और ज्ञान के भेद को स्पष्ट करते हैं.

Description

Day 138 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: श्रद्धायुक्त और अनसूय होकर गीता का श्रवण करने वाले का पापों से मुक्त होना और शुभ लोक प्राप्त करना (18.71), मूढ़तापूर्वक, आत्म-पीड़ा या पर-पीड़ा के लिए किया गया तप तामस कहलाना (17.19), जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है तब-तब भगवान का साकार रूप से प्रकट होना (4.7), योगयुक्त, विशुद्धात्मा, जितेन्द्रिय और सर्वभूतात्मभाव से कर्म करने वाले का अलिप्त रहना (5.7), तथा क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के तत्त्व का ऋषियों, छन्दों और ब्रह्मसूत्रों द्वारा समर्थन (13.4)। यह episode Jagat Ka Saar को श्रद्धा, धर्म, शुद्ध कर्म और शास्त्रीय पुष्टि के साथ जोड़ता है.

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